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राष्ट्रीय कैडेट कोर की स्थापना सन १९१७ में यूनिवर्सिटी ट्रेनिंग कोर के रुप में हुई थी। सन १९४१ में यह यूनिवर्सिटी आफिसर्स ट्रेनिंग कोर के रूप में परिवर्तित हो गई । तीस वर्षों के विकासात्मक परिवर्तन के पश्चात १६ नवंबर १९४८ में एन. सी. सी. ने स्वतंत्र भारत में त्रिआयामी सेवा संघटन के रूप में जन्म लिया जिसमें वर्ष १९४८ में गर्ल्स डिवीजन को, १९५० में एयर विंग को, तथा वर्ष १९५२ में नेवल विंग को सम्मिलित किया गया। उत्तर प्रदेश में एन. सी. सी. सन १९४८ में अस्तित्व में आयी। १७ जनवरी १९५० को ले. कर्नल दिलबाग सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय कैडेट कोर निदेशालय की स्थापना हुई। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में एन. सी. सी. विकास का बहुआयामी महत्व : वर्तमान युग भौतिकता एवं विकास के लिये जाना जाता है। वैज्ञानिक आविष्कारों एवं संचार क्रान्ति ने सम्पूर्ण विश्व एवं वैश्विक गतिविधियों को पूरी तरह समेटकर छोटा कर दिया है इस काम में जीवन मूल्य, रोजगार के अवसर, नैतिकता, सच्चे नेतृत्व, मानवाधिकारों एवं एकता का अपार ह्रास हुआ है। विकास की अन्धी दौड भौतिकता तक ही सीमित है। मानवता के लिये चिन्तन करने वाले विरले ही हैं। इस भाव दशा में एन. सी. सी. का अमूल्य योगदान है। अनुशासन, एकता, क्रियाशीलता, संगठन, नेतृत्व, सेवा, देशप्रेम और सच्ची नागरिकता के प्रति कैडेटों को जागरूक करने का प्रयास ही एन. सी. सी. के प्रशिक्षण का अभिन्न अंग है। एन. सी. सी. संपूर्ण व्यक्तित्व के विकास में अपूर्व योगदान होता है। अनुशासित कैडेट सबके आकर्षण का केंद्र व सबकी आवश्यकता होती है जिसे विकसित करना एन. सी. सी. अपना लक्षय मानता है। एन. सी. सी. आत्मनिर्भरता एवं आत्मविश्वास जागृत करके युवा कैडेट्स नेतृत्व की अनुभव क्षमता प्रदान करने में सर्वदा सक्षम है, जिससे ये न केवल अपने प्रति अन्याय से रक्षा बल्कि समाज एवं राष्ट्र की दिशा एवं विचारधारा को भी बदलने में सक्षम होते हैं। राष्ट्र के उत्थान में एन. सी. सी. का सहयोग : किसी भी राष्ट्र के उत्थान में उस देश के बच्चों एवं नवयुवकों में छिपी संभावनाओं एवं स्थैतिक ऊर्जा का योगदान होता है। एन. सी. सी. इस स्थैतिक ऊर्जा को गतिशीलता एवं स्थूल रूप प्रदान करनेमें भरपूर सहयोग करता है। एन. सी. सी. शब्द सुनने से ही हमारे मन मस्तिष्क में ऐसे किशोर नवयुवक की तस्वीर उभरती है जो अपने आप में अनूठा होता है। हमारे देश की विशेषता अनेकता में एकता एन. सी. सी. का उद्देश्य ही है एकता एवं अनुशासन से पूरित व्यक्तित्व का विकास करना इसके लिये यह संगठन किशोरों को उत्तरदायित्व से ओत प्रोत कार्य करने को प्रेरित करता है। एन. सी. सी. के पास अपने नवयुवकों को प्रशिक्षण देने के लिये अपने उद्देश्य हैं, जिनमें निम्न प्रमुख हैं : > कैडेट्स को राष्ट्र एवं समाज के प्रति उत्तरदायी बनाना >कैडेट्स को आकस्मिक एवं आपातकालीन परिस्थितियों में समाजोपयोगी बनाना > कैडेट्स में एकता एवं अनुशासन की भावना जगाना >कैडेट्स में छिपी सभी विधाओं को प्रगट करना > कैडेट्स में आत्मविश्वास, निर्भीकता एवं साहस उत्पन्न करना > कैडेट्स में निर्णय लेने की क्षमता उत्पन्न करना > कैडेट्स में परोपकार एवं सर्व धर्म संभाव की भावना उत्पन्न करना > कैडेट्स में राष्ट्र सुरक्षा सर्वोपरि की भावना का समावेश करना एन. सी. सी. एक वरदान : एन. सी. सी. राष्ट्रोम के लिये वरदान है जो विभिन्न प्रकार की जातियों के बीच मानवता और एकता का संदेश देता है। एन. सी. सी. आज के समाज में मनुष्य को एक सफल एवं कुशल नागरिक बनाने में सहयोग प्रदान करता है। एन. सी. सी. का सर्वप्रथम उद्देश्य मनुष्य की अंदर की शक्ति को पहचानना है और उसी शक्ति को मनुष्य के भीतर जागृत करना है जिससे मनुष्य की मानसिकता विकसित होती है वर्तमान समय में डी. बी. एस. पी. जी. कालेज में एन. सी. सी. यूनिट में १०६ कैडेट्स हैं जिसमें १८ बलिकायें हैं। वर्तमान समय में एन. सी. सी. यूनिट के प्रभारी लेफ्टिनेंट एन. पी. सिंह हैं एवं वर्ष २००२ से २००७ तक डी. बी. एस. पी. जी. कालेज के अनेकों कैडेट्स सेना की अलग अलग कोर में भर्ती हो चुके हैं। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में एन. सी. सी. छात्रों को पढाई के साथ साथ रोजगार प्रदान करने वाली है एवं सैन्य सेवाओं के अलावा भी छात्रों को एन. सी. सी. के अतिरिक्त अंक कई नौकरियों एवं पाठ्यक्रमों को लाभप्रद होते हैं